मकर संक्रांति आज: सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के साथ शुरू हुआ उत्तरायण, देशभर में स्नान-दान और पूजा का आयोजन
देशभर में आज मकर संक्रांति का पर्व श्रद्धा और परंपरा के साथ मनाया जा रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार इस दिन सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करता है। सूर्य के इस गोचर को संक्रांति कहा जाता है। मकर संक्रांति के साथ ही सूर्य की उत्तर दिशा की यात्रा, जिसे उत्तरायण कहा जाता है, प्रारंभ हो जाती है। धार्मिक मान्यताओं में उत्तरायण काल को शुभ माना गया है।
धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख है कि उत्तरायण काल में किए गए स्नान, दान, जप और पुण्य कर्मों का फल कई गुना प्राप्त होता है। इसी कारण मकर संक्रांति के दिन गंगा, यमुना, गोदावरी, नर्मदा और संगम जैसे पवित्र तीर्थ स्थलों पर स्नान के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। प्रयागराज, हरिद्वार, वाराणसी और गंगासागर में सुबह से ही श्रद्धालुओं ने पवित्र स्नान कर दान-पुण्य किया। मकर संक्रांति पर तिल, गुड़, चावल, वस्त्र, कंबल और अन्न दान का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन दान करने से पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। पितरों के लिए तर्पण करने की भी परंपरा है।

मकर संक्रांति पर तिल और गुड़ से बनी मिठाइयों का विशेष महत्व है। देश के अलग-अलग हिस्सों में तिल के लड्डू, गजक, रेवड़ी, तिलकुट और गुड़ की चिक्की बनाई जाती है। आयुर्वेद के अनुसार तिल और गुड़ सर्दी के मौसम में शरीर को ऊर्जा और गर्मी प्रदान करते हैं।महाराष्ट्र में लोग एक-दूसरे को तिल-गुड़ देकर आपसी सौहार्द का संदेश देते हैं।
उत्तर भारत में मकर संक्रांति को खिचड़ी पर्व के रूप में भी मनाया जाता है। इस दिन चावल, दाल और घी से बनी खिचड़ी खाने और दान करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के साथ-साथ इसे मौसम के अनुसार स्वास्थ्यवर्धक भोजन माना जाता है। मकर संक्रांति पर कई राज्यों में पतंग उड़ाने की परंपरा है। गुजरात, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से भर जाता है। इसे खुशी और उत्सव का प्रतीक माना जाता है।
मकर संक्रांति का महत्व कृषि से भी जुड़ा हुआ है। इस समय रबी फसलों की अच्छी वृद्धि होती है। सूर्य के उत्तरायण होने से दिन लंबे और रातें छोटी होने लगती हैं, जिससे मौसम में धीरे-धीरे बदलाव आता है। त्योहार के मद्देनज़र प्रमुख तीर्थ स्थलों पर प्रशासन द्वारा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। स्नान घाटों पर पुलिस बल, स्वास्थ्य सेवाएं और यातायात प्रबंधन की व्यवस्था की गई है।

मकर संक्रांति भारतीय संस्कृति का एक प्रमुख पर्व है, जो धार्मिक, सामाजिक और वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। यह पर्व नई शुरुआत, दान-पुण्य और सामाजिक सौहार्द का संदेश देता है।
