एम्स ऋषिकेश का अध्ययन: मिलेट-आधारित लड्डुओं से युवा महिलाओं में आयरन और कैल्शियम स्तर में उल्लेखनीय सुधार

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ऋषिकेश : एम्स ऋषिकेश द्वारा किए गए एक महत्वपूर्ण अध्ययन में यह सामने आया है कि मिलेट ,मोटे अनाज से बने लड्डुओं का नियमित सेवन युवा महिलाओं के शरीर में आयरन और कैल्शियम के स्तर को प्रभावी ढंग से बढ़ाता है। अध्ययन के निष्कर्ष बताते हैं कि मिलेट-आधारित यह पूरक आहार न केवल पोषण की कमी से जूझ रही युवतियों के लिए लाभकारी है, बल्कि यह एक किफायती, सुरक्षित और दीर्घकालिक समाधान भी साबित हो सकता है।

संस्थान की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने शोध को तथ्यात्मक और वैज्ञानिक आधार पर मजबूत बताते हुए निष्कर्ष तक पहुंचने वाली पूरी टीम की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह अध्ययन सार्वजनिक स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से अत्यंत उपयोगी है, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहां एनीमिया और कैल्शियम की कमी एक गंभीर समस्या बनी हुई है। मिलेट्स या मोटे अनाज में ज्वार, बाजरा, रागी ,फिंगर मिलेट, कोदा, कंगनी ,फॉक्सटेल मिलेट, कुटकी, सामा ,लिटिल और झंगोरा ,बार्नयार्ड मिलेट प्रमुख हैं। ये अनाज प्रोटीन, फाइबर, आयरन, कैल्शियम और अन्य आवश्यक खनिजों से भरपूर होते हैं। पारंपरिक भारतीय आहार का हिस्सा रहे ये अनाज अब आधुनिक पोषण विज्ञान में भी अपनी उपयोगिता सिद्ध कर रहे हैं।

इस अध्ययन के लिए एम्स ऋषिकेश के कॉलेज ऑफ नर्सिंग की छात्राओं को प्रतिभागी बनाया गया। शोध का उद्देश्य यह जानना था कि मिलेट से बने लड्डुओं का नियमित सेवन टीन एज और युवा महिलाओं के पोषण स्तर पर क्या प्रभाव डालता है। गहन अध्ययन के दौरान पाया गया कि लड्डुओं के सेवन से प्रतिभागियों के शरीर में आयरन और कैल्शियम सहित विभिन्न पोषक तत्वों के स्तर में स्पष्ट बढ़ोतरी हुई।महत्वपूर्ण बात यह रही कि इस पूरक आहार का शरीर के वजन या बॉडी कंपोजीशन पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ा। यानी, पोषण में सुधार के साथ-साथ यह आहार संतुलित भी रहा।

यह शोध कॉलेज ऑफ नर्सिंग की प्रिंसिपल प्रो. डॉ. स्मृति अरोड़ा के नेतृत्व में किया गया। टीम में शरीर क्रिया विज्ञान विभाग से डॉ. पूर्वी कुलश्रेष्ठ, सीएफएम से डॉ. रंजीता, नर्सिंग फैकल्टी से डॉ. जेवियर वेल्सियाल और न्यूट्रीशियन फासिया मदाला शामिल थीं। सभी विशेषज्ञों ने मिलकर अध्ययन को वैज्ञानिक पद्धति से अंजाम दिया और निष्कर्षों को प्रमाणिक रूप से प्रस्तुत किया।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह अध्ययन स्कूलों, कॉलेजों और सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों में मिलेट-आधारित पूरक आहार को शामिल करने की दिशा में एक ठोस आधार प्रदान करता है। इससे न केवल एनीमिया जैसी समस्याओं से निपटा जा सकता है, बल्कि युवतियों के समग्र स्वास्थ्य में भी सुधार संभव है। एम्स ऋषिकेश का यह अध्ययन एक बार फिर यह साबित करता है कि पारंपरिक भारतीय अनाज आधुनिक स्वास्थ्य चुनौतियों का प्रभावी समाधान बन सकते हैं।

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