कैलाश खेर, शिवमणि सहित कई कलाकार देंगे सांस्कृतिक प्रस्तुतियां
ऋषिकेश : परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश में आयोजित होने वाले 38वें इंटरनेशनल योगा फेस्टिवल के लिए तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इस वर्ष परमार्थ निकेतन परिवार लगभग 80 देशों से आए करीब 1200 योग साधकों का स्वागत करने के लिए पूरी तरह तैयार है। इस प्रतिष्ठित महोत्सव का विधिवत उद्घाटन 9 मार्च 2026 को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी करेंगे। पूरे सप्ताह चलने वाले इस आयोजन में विभिन्न देशों के राजनयिक, मंत्रीगण, विशिष्ट अतिथि और आध्यात्मिक गुरुओं की सहभागिता रहेगी।
इंटरनेशनल योगा फेस्टिवल को भारत ही नहीं बल्कि विश्व स्तर पर भी विशेष पहचान मिली है। टाइम मैग्जीन, न्यूयॉर्क टाइम्स और सीएनएन सहित कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया मंचों पर इसे प्रमुखता से स्थान मिल चुका है। यह महोत्सव भारत के महान आध्यात्मिक गुरुओं और योग आचार्यों को एक मंच पर लाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। वर्ष 2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इस महोत्सव का उद्घाटन किया था, जबकि 2018 में तत्कालीन उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने इसका उद्घाटन प्रत्यक्ष रूप से किया था।परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष परम पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती और इंटरनेशनल योगा फेस्टिवल की निदेशक साध्वी भगवती सरस्वती विश्वभर से आए योगाचार्यों और प्रतिभागियों का अपने हिमालयी आश्रम में स्वागत करते हुए उन्हें उत्तराखंड और भारत की दिव्य आध्यात्मिक परंपरा से जोड़ने का सतत प्रयास कर रहे हैं। इस वर्ष का महोत्सव योग की सनातन ज्ञान परंपरा को भारत की समृद्ध आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत के साथ जोड़ते हुए प्रतिभागियों को एक व्यापक, प्रेरणादायक और परिवर्तनकारी अनुभव प्रदान करेगा।
इस वर्ष के महोत्सव में शिवा रिया, आनंद मेहरोत्रा, किया मिलर, रूना रिजवी शिवमणि, स्टीवर्ट गिलक्रिस्ट, साध्वी आभा सरस्वती, गंगा नंदिनी, आध्या, डॉ. गणेश राव और डॉ. एच.आर. नागेन्द्र सहित कई प्रतिष्ठित योग गुरु और वक्ता अपने सत्रों के माध्यम से प्रतिभागियों को योग और आध्यात्मिकता का ज्ञान प्रदान करेंगे। इसके अलावा टॉमी रोसेन, एरिका कॉफमैन, मोहन भंडारी और डॉ. इंदु शर्मा जैसे अंतरराष्ट्रीय योगाचार्य प्रेरणादायी योग कक्षाओं का संचालन करेंगे।महोत्सव के दौरान संध्याकालीन सांस्कृतिक कार्यक्रम भी विशेष आकर्षण का केंद्र होंगे। इनमें प्रसिद्ध ड्रम वादक शिवमणि और रूना रिजवी, राधिका दास एंड फ्रेंड्स, सुधांशु शर्मा, साइमन ग्लोडे, पद्मश्री कैलाश खेर और कैलासा बैंड, कृष्णप्रिया, गुरनिमित सिंह तथा परमार्थ के ऋषिकुमारों द्वारा प्रस्तुतियां दी जाएंगी। हिमालय की गोद में होने वाले ये कार्यक्रम मंत्र, संगीत और भक्ति की ध्वनि से वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देंगे।
इंटरनेशनल योगा फेस्टिवल की पूर्व संध्या पर अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर माँ गंगा के तट पर विशेष गंगा आरती का आयोजन किया गया, जो नारी शक्ति को समर्पित रही। इस अवसर पर विश्व शांति, एकता और समरसता के लिए प्रार्थना की गई। महिला दिवस के उपलक्ष्य में “विमेन इन रिदम – योगा एंड ड्रमिंग फॉर वेलबीइंग” कार्यक्रम का आयोजन प्रसिद्ध योगाचार्या शिवा रिया के साथ किया गया। इसके बाद साध्वी भगवती सरस्वती के साथ भावपूर्ण सत्संग और गंगा आरती ने वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर कर दिया।
इस वर्ष महोत्सव में प्रतिभागियों को 150 से अधिक योग कक्षाओं, कार्यशालाओं, प्रवचनों और संवाद सत्रों में भाग लेने का अवसर मिलेगा। इनमें कुंडलिनी योग, हठ योग, योग निद्रा, प्राणायाम, ध्यान, आयुर्वेद, ध्वनि चिकित्सा, भारतीय शास्त्रीय नृत्य और संगीत जैसे विविध विषय शामिल हैं। माँ गंगा के पावन तट पर ध्यान, प्रार्थना और सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ प्रतिभागियों को भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का अनूठा अनुभव प्रदान करेंगी।स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि आज जब विश्व विभाजन, संघर्ष और असंतोष की पीड़ा से जूझ रहा है, ऐसे समय में योग के माध्यम से वैश्विक परिवार को माँ गंगा के तट और हिमालय की दिव्य गोद में आमंत्रित किया जा रहा है, ताकि वे यहां से शांति, सद्भाव और एकात्मता का संदेश लेकर जाएं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड केवल एक भूभाग नहीं, बल्कि योग, तप, त्याग और ध्यान की पवित्र भूमि है, जहां सदियों से ऋषि-मुनियों की तपस्या ने मानवता को मार्ग दिखाया है।
साध्वी भगवती सरस्वती ने कहा कि ऋषिकेश वह पावन भूमि है जहां हजारों वर्षों से ऋषि-मुनि और संत साधना के लिए आते रहे हैं। इंटरनेशनल योगा फेस्टिवल में आने वाले प्रतिभागियों को यहां योग शिक्षकों के साथ-साथ माँ गंगा और हिमालय की दिव्य ऊर्जा का भी अनुभव होता है, जो उन्हें आत्मिक रूप से परिवर्तित करता है।
मुंबई से आई प्रतिभागी गीना ने कहा कि यह उनका पहला इंटरनेशनल योगा फेस्टिवल है और ऋषिकेश पहुंचते ही उन्हें यहां की सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव हुआ। वहीं स्टेसी ने कहा कि इस पवित्र भूमि में इतने प्रेरणादायी योग साधकों के साथ एक सप्ताह बिताना उनके लिए अविस्मरणीय अनुभव होगा।
