सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर खाली प्लॉट चिह्नीकरण, स्थानीय लोगों में आक्रोश

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ऋषिकेश के बापूग्राम और आसपास के इलाकों में उस समय भारी हंगामा खड़ा हो गया, जब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में खाली प्लॉटों का चिह्नीकरण करने पहुंची वन विभाग की टीम का स्थानीय लोगों ने कड़ा विरोध किया। दोपहर से लेकर देर शाम तक चले विरोध प्रदर्शन के दौरान लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी, जिसके चलते वन विभाग को पीछे हटना पड़ा और सर्वे की कार्रवाई अधूरी रह गई।

जानकारी के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर वन विभाग की टीम विभिन्न रेंजों के रेंजरों और वनकर्मियों के साथ बापूग्राम, मीरानगर, बीस बीघा और शिवाजी नगर क्षेत्रों में खाली प्लॉटों का निरीक्षण व चिह्नीकरण करने पहुंची थी। जैसे ही टीम बापूग्राम की दो नंबर गली में दाखिल हुई, स्थानीय लोगों ने टीम को घेर लिया और विरोध शुरू कर दिया। बढ़ते दबाव को देखते हुए टीम को वहां से वापस लौटना पड़ा।

इसके बाद वन विभाग की टीम केंद्रीय विद्यालय की ओर जाने वाली गली में स्थित एक खाली स्थान पर एकत्रित हुई। इस बीच विरोध की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग अपने-अपने घरों से बाहर निकल आए और देखते ही देखते मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई। लोगों ने वन विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। स्थिति को बिगड़ता देख पुलिस भी मौके पर पहुंची और हालात को संभालने का प्रयास किया।

विरोध इतना तीव्र था कि वन विभाग की ओर से बुलाई गई जेसीबी मशीन को भी स्थानीय लोगों ने मौके पर ही रोक दिया। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि वन विभाग की यह कार्रवाई पूरी तरह गलत है और इससे स्थानीय निवासियों के हितों को नुकसान पहुंच सकता है। लोगों का कहना था कि वर्षों से बसे इलाकों को खाली प्लॉट बताकर चिन्हित किया जा रहा है, जो स्वीकार्य नहीं है।

उल्लेखनीय है कि शिवाजी नगर क्षेत्र में वन विभाग की टीम द्वारा बृहस्पतिवार को प्लॉटों की रेकी की जा चुकी थी, जिसके बाद से ही स्थानीय लोगों में नाराजगी बनी हुई थी। वन विभाग के अनुसार, पूर्व में कुछ भूमि पशुलोक सेवा समिति को आवंटित की गई थी, लेकिन उस भूमि से जुड़े कुछ मामलों को लेकर लोग सीधे सुप्रीम कोर्ट चले गए थे। इन्हीं मामलों में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत खाली प्लॉटों का चिह्नीकरण किया जाना है।

इस पूरे मामले पर एसडीएम ऋषिकेश योगेश मेहरा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन करना प्रशासन और वन विभाग की जिम्मेदारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि न्यायालय के निर्देशों के अनुसार ही कार्रवाई की जा रही है और कानून के दायरे में रहकर आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

फिलहाल, स्थानीय लोगों के भारी विरोध के चलते वन विभाग की टीम बिना सर्वे पूरा किए लौट गई। प्रशासन की ओर से अब आगे की रणनीति पर विचार किया जा रहा है, ताकि कानून-व्यवस्था बनाए रखते हुए सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन सुनिश्चित किया जा सके।

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