यूपीआई पेमेंट पर एमडीआर शुल्क टला, दिवाली तक कारोबारियों को राहत; नए साल में लागू होने की चर्चा

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नई दिल्ली। त्योहारी सीजन में कारोबारियों को राहत देते हुए नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) ने यूपीआई मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) शुल्क लागू करने के फैसले को फिलहाल टाल दिया है। यह शुल्क 15 अक्टूबर 2026 से लागू होना था, लेकिन अब इसे दिवाली तक के लिए स्थगित कर दिया गया है। दिवाली के बाद शुल्क लागू करने को लेकर नई अधिसूचना जारी की जाएगी। वहीं, सूत्रों के मुताबिक इसे नए साल में लागू किए जाने की संभावना भी जताई जा रही है।

2000 रुपये से अधिक के भुगतान पर लगना था शुल्क

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत कारोबारियों को 2000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर 0.40 प्रतिशत एमडीआर शुल्क देना पड़ता। हालांकि, दो व्यक्तियों के बीच होने वाले यूपीआई लेनदेन को इस शुल्क से बाहर रखा गया था। इस फैसले के सामने आने के बाद कारोबारियों ने इसका विरोध किया था। उनका कहना था कि अतिरिक्त शुल्क से व्यापार की लागत बढ़ेगी और डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने की मुहिम पर भी असर पड़ सकता है।

ग्राहकों पर पड़ सकता था अतिरिक्त बोझ

एमडीआर शुल्क को लेकर कारोबारियों और सरकार के बीच सहमति बनाने की कोशिशें भी चल रही थीं। कुछ कारोबारी संगठनों ने सरकार को भरोसा दिलाया था कि शुल्क का बोझ ग्राहकों पर नहीं डाला जाएगा। हालांकि, विशेषज्ञों ने आशंका जताई कि कारोबारियों पर बढ़ने वाली लागत का असर अंततः ग्राहकों तक पहुंच सकता है।

सरकार की ओर से इस संभावित स्थिति को रोकने के लिए बैंक प्रबंधन और कारोबारियों के बीच बातचीत के जरिए समाधान तलाशने की बात भी कही गई थी। इसके लिए एक प्रभावी व्यवस्था तैयार करने पर विचार किया जा रहा था। इससे पहले वित्त मंत्रालय शुल्क वापस लेने की मांग को स्वीकार करने से इनकार कर रहा था।

विरोध के बीच सरकार ने टाला फैसला

कारोबारी संगठनों के विरोध और त्योहारी सीजन में व्यापार पर संभावित असर को देखते हुए शुल्क लागू करने की समयसीमा आगे बढ़ा दी गई है। फिलहाल कारोबारियों को तत्काल अतिरिक्त शुल्क से राहत मिलेगी। हालांकि, यह राहत कितने समय तक जारी रहेगी, इस पर स्थिति दिवाली के बाद स्पष्ट होने की उम्मीद है।

यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) के माध्यम से होने वाले भुगतान से जुड़े मामलों में एनपीसीआई की अहम भूमिका है। अब कारोबारियों और ग्राहकों की नजर इस बात पर रहेगी कि दिवाली के बाद शुल्क को लेकर क्या निर्णय लिया जाता है और नई व्यवस्था कब से प्रभावी होती है।

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