मुख्यमंत्री धामी के निर्देश पर पौड़ी के राजकीय नर्सिंग कॉलेज डोभ का नाम बदला

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पौड़ी : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर पौड़ी जनपद स्थित राजकीय नर्सिंग कॉलेज डोभ (श्रीकोट) का नाम बदलकर अब ‘स्वर्गीय अंकिता भंडारी राजकीय नर्सिंग कॉलेज’ कर दिया गया है। इस संबंध में स्वास्थ्य सचिव द्वारा औपचारिक आदेश जारी कर दिए गए हैं। राज्य सरकार के इस निर्णय को अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की दिशा में एक भावनात्मक और संवेदनशील कदम के रूप में देखा जा रहा है। सरकारी आदेश के अनुसार, नर्सिंग कॉलेज के नाम परिवर्तन की प्रक्रिया तत्काल प्रभाव से लागू मानी जाएगी। कॉलेज से जुड़े सभी शासकीय अभिलेखों, पत्राचार, बोर्ड और दस्तावेजों में अब नया नाम अंकिता किया जाएगा। सरकार का कहना है कि यह निर्णय न केवल अंकिता की स्मृति को चिरस्थायी बनाएगा, बल्कि समाज को यह संदेश भी देगा कि राज्य पीड़ित परिवार के साथ खड़ा है।

इसी क्रम में अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर एक और महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। अंकिता के माता-पिता की मांग पर मामले की सीबीआई जांच कराए जाने की संभावना को लेकर विधिक परीक्षण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। शासन स्तर पर कानूनी पहलुओं की गहन समीक्षा की जा रही है, ताकि यह तय किया जा सके कि प्रकरण को केंद्रीय जांच एजेंसी को सौंपने की प्रक्रिया किस प्रकार आगे बढ़ाई जाए।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस पूरे घटना क्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राज्य सरकार शुरू से ही पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मामले में किसी भी स्तर पर लापरवाही या दोषियों को बचाने का प्रयास नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि कानून अपना काम कर रहा है और दोषियों को सख्त से सख्त सजा दिलाई जाएगी।इस दौरान मुख्यमंत्री ने कुछ राजनीतिक दलों पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ दल इस संवेदनशील मामले का राजनीतिकरण कर रहे हैं, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह विषय राजनीति का नहीं, बल्कि न्याय और संवेदना का है। उन्होंने राजनीतिक दलों से अपील की कि वे इस मामले में भ्रम फैलाने या राजनीतिक लाभ लेने के बजाय जिम्मेदार व्यवहार करें और जनता से माफी मांगें।

राज्य सरकार के इस फैसले के बाद स्थानीय स्तर पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कई सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों ने नर्सिंग कॉलेज का नाम अंकिता के नाम पर रखने के निर्णय का स्वागत किया है। उनका कहना है कि इससे न केवल अंकिता की यादें जीवित रहेंगी, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा और न्याय के मुद्दे पर समाज में जागरूकता भी बढ़ेगी। वहीं, अंकिता के परिजनों का कहना है कि सरकार के इन कदमों से उन्हें कुछ हद तक संतोष मिला है, लेकिन उनकी प्राथमिक मांग अब भी यही है कि हत्याकांड की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच हो तथा दोषियों को जल्द से जल्द सजा मिले।

फिलहाल, पूरे मामले पर प्रदेश की राजनीति और प्रशासन की नजर बनी हुई है। सीबीआई जांच को लेकर चल रही विधिक प्रक्रिया और आगे के सरकारी निर्णयों पर सबकी निगाहें टिकी हैं, जिससे यह साफ हो सके कि अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की दिशा में अगला कदम क्या होगा।

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