परमार्थ निकेतन में अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव का छठा दिन, 80 देशों के साधकों ने लिया भाग

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ऋषिकेश: पवित्र गंगा तट पर स्थित परमार्थ निकेतन में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव का छठा दिन लगभग 80 देशों से आए 1500 से अधिक प्रतिभागियों की सहभागिता के साथ अत्यंत प्रेरणादायी और ऐतिहासिक रहा। यह दिन भारत की सनातन योग परंपरा को सम्मान देने तथा योग की प्रामाणिक परंपरा के संरक्षण को समर्पित रहा।परम पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती और पूज्य साध्वी भगवती सरस्वती के दिव्य नेतृत्व में तथा भारत सरकार के आयुष मंत्रालय और पर्यटन मंत्रालय के सहयोग से आयोजित इस दिवस का मुख्य आकर्षण “भारत, सनातन योग, परंपरा के संरक्षण और विरासत का संरक्षण” विषय पर विशेष आध्यात्मिक प्लेनरी सत्र रहा। इस सत्र में विश्व के प्रमुख विद्वानों और योग साधकों ने भाग लेते हुए बदलती वैश्विक परिस्थितियों में योग की गहराई और उसकी प्रामाणिकता को सुरक्षित रखने की आवश्यकता पर विचार साझा किए।

महोत्सव की गरिमा उस समय और बढ़ गई जब 11 देशों के राजनयिकों, जिनमें कई राजदूत और उच्चायुक्त शामिल थे, ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। उनकी उपस्थिति ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि योग केवल शारीरिक अभ्यास नहीं, बल्कि वैश्विक एकता, शांति और सामूहिक कल्याण का सशक्त माध्यम है।इस दिन का एक और विशेष आकर्षण पूज्य साध्वी भगवती सरस्वती के 54वें जन्मदिवस का उल्लासपूर्ण उत्सव रहा। विश्वभर से आए योग साधकों और प्रतिभागियों ने आध्यात्मिक वातावरण में उनका जन्मोत्सव मनाते हुए उनके योगदान को नमन किया। महोत्सव का समापन समारोह माननीय राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह की गरिमामयी उपस्थिति में सम्पन्न होने जा रहा है, जो इस अंतर्राष्ट्रीय आयोजन को प्रेरणादायी आध्यात्मिक समापन प्रदान करेगा।

प्रातःकालीन सत्र की शुरुआत परमार्थ निकेतन के पवित्र गंगा तट पर विशेष अग्नि यज्ञ एवं हवन के साथ हुई, जिसका नेतृत्व पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती और पूज्य साध्वी भगवती सरस्वती ने किया। इस यज्ञ के माध्यम से विश्व में शांति, स्वास्थ्य और सामंजस्य की कामना की गई। इसी अवसर पर वैश्विक योग परिवार ने हर्षोल्लास के साथ साध्वी भगवती सरस्वती के जन्मोत्सव समारोह की शुरुआत की।वक्ताओं और साधकों ने इस अवसर पर पूज्य साध्वी भगवती सरस्वती के उस अद्वितीय योगदान को भी श्रद्धापूर्वक स्मरण किया, जिसके माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव विश्वभर में प्रसिद्ध हुआ है। उन्होंने सनातन धर्म और योग की शिक्षाओं को विश्व के विभिन्न समुदायों तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

छठे दिन का मुख्य आकर्षण “भारत योग की सनातन भूमि: परंपरा के संरक्षण और विरासत का संरक्षण” विषय पर आयोजित आध्यात्मिक प्लेनरी सत्र रहा। इस सत्र में प्रतिष्ठित वक्ताओं ने अपने विचार साझा किए, जिनमें डॉ. एच.आर. नागेन्द्र, डॉ. आनंद बालयोगी भावनानी, डॉ. क्रिस्टोफर की चैपल, डॉ. गणेश राव और डॉ. रुचि गुलाटी शामिल थे। सत्र का संचालन परमार्थ निकेतन की वरिष्ठ योगाचार्या गंगा नंदिनी ने किया।डॉ. गणेश राव ने कहा कि “भारत” शब्द का अर्थ है सत्य और ज्ञान की खोज करने वाला। योग की विरासत हजारों वर्षों से ऋषियों, मुनियों और वेदों के माध्यम से पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ती आई है और परंपरा ही इस विरासत की रक्षा का सशक्त माध्यम है।

डॉ. क्रिस्टोफर चैपल ने कहा कि योग हमें अपने भीतर उस दिव्य चेतना से जोड़ता है जो समय और परिस्थितियों से परे है। वहीं डॉ. रुचि गुलाटी ने शिव और शक्ति के उदाहरण से समझाया कि आध्यात्मिक शक्ति साधना से विकसित होती है और यह हमें भीतर तथा बाहर के अंधकार को समाप्त करने की शक्ति प्रदान करती है।डॉ. आनंद बालयोगी भावनानी ने जीवन में संतुलन और त्याग की भावना पर बल देते हुए कहा कि जितना अधिक हम पकड़ने की कोशिश करते हैं, उतना ही कम प्राप्त होता है। डॉ. एच.आर. नागेन्द्र ने योग और विज्ञान के संबंध पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा अनुभव और परीक्षण दोनों को समान महत्व देती है। उन्होंने दान, दया और इंद्रिय नियंत्रण को जीवन के तीन महत्वपूर्ण स्तंभ बताया।

प्रातःकालीन साधना और योग अभ्यास के सत्रों में हठ योग, कुंडलिनी योग, सूर्य नमस्कार, प्राणायाम तथा पंचकोश संतुलन जैसे अनेक अभ्यास कराए गए, जिनका उद्देश्य शरीर, मन और आत्मा के संतुलन को जागृत करना था।दोपहर और संध्या सत्रों में आयुर्वेद, योग दर्शन, ध्वनि चिकित्सा, ध्यान तथा आध्यात्मिक ज्ञान से जुड़े अनेक सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों में प्रतिभागियों ने भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं के गूढ़ ज्ञान को समझने और अपने जीवन में उसे अपनाने की प्रेरणा प्राप्त की।

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