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कोटद्वार: राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने कहा कि पहाड़ की मातृशक्ति हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और यदि ग्रामीण महिलाओं को माइक्रोफाइनेंस जैसी योजनाओं के माध्यम से मजबूत बनाया जाए तो पलायन की समस्या को काफी हद तक रोका जा सकता है।कोटद्वार स्थित पं० पीतांबर दत्त बड़थ्वाल हिमालयन राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में ‘माइक्रोफाइनेंस के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं के पलायन को रोकने एवं उनके आर्थिक सशक्तिकरण’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला में राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुईं।

कार्यशाला को संबोधित करते हुए कुसुम कंडवाल ने कहा कि उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं परिवार और समाज की आर्थिक संरचना को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने कहा कि माइक्रोफाइनेंस, स्वयं सहायता समूह और छोटे-छोटे स्वरोजगार के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है, जिससे गांवों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और पलायन पर भी अंकुश लगेगा।

उन्होंने कहा कि जब ग्रामीण महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत होंगी तो वे न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे समाज के विकास में अहम योगदान देंगी। राज्य के संतुलित और सर्वांगीण विकास के लिए महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण अत्यंत आवश्यक है।कुसुम कंडवाल ने कार्यशाला के आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के कार्यक्रम महिलाओं को नई दिशा देने के साथ-साथ उन्हें स्वरोजगार और वित्तीय प्रबंधन के प्रति जागरूक बनाने में सहायक सिद्ध होते हैं। उन्होंने महाविद्यालय परिवार और आयोजन से जुड़े सभी लोगों को इस सार्थक पहल के लिए बधाई भी दी।

कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों ने माइक्रोफाइनेंस, स्वयं सहायता समूहों की भूमिका, ग्रामीण महिलाओं के लिए उपलब्ध वित्तीय अवसरों और स्वरोजगार की संभावनाओं पर भी विस्तार से चर्चा की। कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राध्यापक, शोधार्थी, छात्र-छात्राएं तथा स्थानीय महिलाएं बड़ी संख्या में उपस्थित रहीं।

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