ऋषिकेश में अमित शाह के आगमन पर लगे “गो बैक” नारे, महिलाओं का पूर्व घोषित शांतिपूर्ण विरोध

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ऋषिकेश: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के ऋषिकेश आगमन के दौरान लगे “गो बैक” नारों को लेकर सियासत गरमा गई है। इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए आंदोलन में शामिल महिलाओं और पार्टी नेताओं ने स्पष्ट किया है कि यह कोई अचानक या अनियोजित विरोध नहीं था, बल्कि पूर्व से घोषित शांतिपूर्ण कार्यक्रम के तहत केंद्रीय गृह मंत्री से मुलाकात कर अपनी बात रखने की योजना बनाई गई थी।

पार्टी नेता प्रमिला रावत ने बताया कि महिलाओं का उद्देश्य सरकार की जनविरोधी नीतियों, प्रदेश की बदहाल स्थिति और उत्तराखंड को विनाश की ओर धकेलने वाले निर्णयों के संबंध में केंद्रीय गृह मंत्री को अवगत कराना था। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण था और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने के लिए आयोजित किया गया था।प्रमिला रावत के अनुसार, जैसे ही महिलाएं त्रिवेणी घाट से आगे बढ़ीं, पुलिस ने दल-बल के साथ जानकी सेतु पर उन्हें रोक लिया। इसके बाद सभी महिलाओं को हिरासत में लेकर ऋषिकेश कोतवाली ले जाया गया। उन्होंने इस कार्रवाई को लोकतंत्र में जनता की आवाज़ को दबाने का एक और उदाहरण बताया।

कोतवाली परिसर में भी महिलाओं ने साहस के साथ “गो बैक अमित शाह जी” के नारे लगाए और अपनी मांगों व विरोध को मजबूती से रखा। इस दौरान आंदोलन में कई वरिष्ठ महिला नेत्रियां और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहीं, जिनमें रामेश्वरी चौहान, लक्ष्मी बुडकोटी, शशि बागवाल, राजेश्वर रावत, लक्ष्मी देवी, गंगा देवी, मंजू कलूड़ा, नगर अध्यक्ष महिला प्रकोष्ठ सरिता चौहान, मैत्री संस्था से कुसुम जोशी और पार्षद सरोजनी थपलिया प्रमुख रूप से शामिल थीं।

महिलाओं के समर्थन में पार्टी के वरिष्ठ नेता भी बड़ी संख्या में ऋषिकेश कोतवाली पहुंचे। इनमें शांति प्रसाद भट्ट, पूर्व प्रत्याशी महेंद्र सिंह, जय सिंह, पुरुषोत्तम बुराकोटी, मोहित डिमरी, विकास रियाल, संजय बरथवाल, आशुतोष शर्मा, रजत, विनय नौटियाल, वीरेंद्र नौटियाल सहित कई अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।

नेताओं और कार्यकर्ताओं ने एक स्वर में कहा कि जनता की आवाज़ को दबाया जा सकता है, लेकिन उसे समाप्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने सभी समर्थकों का आभार व्यक्त करते हुए यह भी स्पष्ट किया कि यह संघर्ष आगे भी जारी रहेगा और लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए आंदोलन लगातार चलता रहेगा।

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