प्रधानमंत्री मोदी ने मुख्य सचिवों के राष्ट्रीय सम्मेलन की अध्यक्षता की
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राजधानी दिल्ली में आयोजित मुख्य सचिवों के राष्ट्रीय सम्मेलन की अध्यक्षता की। इस दौरान शासन, नीति सुधार और प्रशासनिक नवाचारों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर केंद्र और राज्यों के बीच गहन एवं सार्थक चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने इस सम्मेलन को सहकारी संघवाद को मजबूत करने और राज्यों के साथ समन्वय बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि दिल्ली में आयोजित मुख्य सचिवों के राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान शासन और सुधारों से जुड़े विभिन्न विषयों पर व्यापक चर्चा हुई। अधिकारियों के अनुसार यह सम्मेलन राष्ट्रीय विकास प्राथमिकताओं को लेकर केंद्र और राज्यों के बीच संरचित और सतत संवाद का एक प्रभावी मंच बनकर उभरा है।
सम्मेलन में प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पीके मिश्रा, शक्तिकांत दास, कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन, नीति आयोग के सदस्य, केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों व विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिव तथा विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने भाग लिया।इस वर्ष सम्मेलन का मुख्य विषय ‘विकसित भारत के लिए मानव पूंजी’ रखा गया है। इसके अंतर्गत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अपनाई जा सकने वाली श्रेष्ठ प्रक्रियाओं और रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया जा रहा है। विशेष रूप से प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा, स्कूली शिक्षा, कौशल विकास, उच्च शिक्षा तथा खेल एवं सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों जैसे पांच प्रमुख क्षेत्रों पर फोकस किया गया है।

सम्मेलन की रूपरेखा के अनुसार सप्ताहांत में छह विशेष सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। इनमें राज्यों में डी-रेगुलेशन, शासन में तकनीक के अवसर और जोखिम, स्मार्ट सप्लाई चेन व बाजार संपर्क के लिए एग्रीस्टैक, ‘एक राज्य–एक विश्वस्तरीय पर्यटन स्थल’, आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशी पहल तथा वामपंथी उग्रवाद मुक्त भविष्य से जुड़े विषयों पर विस्तार से चर्चा की जा रही है। इसके अतिरिक्त विरासत और पांडुलिपियों के संरक्षण व डिजिटलीकरण, तथा ‘आयुष फार ऑल’ के तहत प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं में पारंपरिक ज्ञान के एकीकरण जैसे विषयों पर भी मंथन किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री के सहकारी संघवाद के विजन पर आधारित यह सम्मेलन केंद्र और राज्यों को एक साझा रोडमैप तैयार करने का अवसर प्रदान करता है, जिससे देश की मानव पूंजी का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित हो सके और भारत के समावेशी, सतत एवं भविष्य-उन्मुख विकास को नई गति मिल सके।
