स्टेचू ऑफ़ यूनिटी के शिल्पकार पद्मभूषण राम वी. सुतार का निधन, कला जगत में शोक की लहर
नोएडा : भारत की मूर्तिकला को विश्व पटल पर नई पहचान दिलाने वाले, स्टेचू ऑफ़ यूनिटी के महान शिल्पकार और पद्मभूषण से सम्मानित राम वंजू सुतार का निधन हो गया। उन्होंने 100 वर्ष 10 महीने की दीर्घायु में नोएडा स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। उनके निधन से न केवल कला जगत बल्कि पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है।
राम वी. सुतार भारतीय मूर्तिकला के ऐसे स्तंभ थे, जिनकी कृतियों ने इतिहास, संस्कृति और राष्ट्र भाव को पत्थर और कांसे में जीवंत रूप दिया। गुजरात में सरदार वल्लभभाई पटेल को समर्पित स्टेचू ऑफ़ यूनिट जो विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा है उनकी अद्वितीय प्रतिभा का प्रतीक है। इस प्रतिमा ने भारत को वैश्विक पहचान दिलाई और भारतीय शिल्पकला की क्षमता को दुनिया के सामने स्थापित किया।

नोएडा में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की भव्य प्रतिमा सहित देश के विभिन्न हिस्सों में स्थापित उनकी कृतियां भारतीय सांस्कृतिक चेतना को दर्शाती हैं। उन्होंने बच्चों के साथ मिलकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की सबसे ऊंची प्रतिमा बनाने का सपना भी देखा था, जो दुर्भाग्यवश उनके जीवनकाल में पूरा नहीं हो सका। यह अधूरी इच्छा उनके मन में अंतिम समय तक जीवित रही।
राम वी. सुतार को उनके अतुलनीय योगदान के लिए देश के कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया, जिनमें पद्मभूषण प्रमुख है। सादगी, समर्पण और अथक परिश्रम उनके व्यक्तित्व की पहचान थी। सौ वर्ष से अधिक की आयु में भी वे सृजनशीलता से जुड़े रहे और नई पीढ़ी के कलाकारों के लिए प्रेरणा बने रहे।

उनके निधन पर प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्रियों, राज्य सरकारों और कला जगत की हस्तियों ने गहरा शोक व्यक्त किया है। सभी ने उन्हें भारतीय कला परंपरा का अमर हस्ताक्षर बताते हुए कहा कि उनकी कृतियां आने वाली पीढ़ियों को देशभक्ति, एकता और सांस्कृतिक गौरव का संदेश देती रहेंगी।
राम वी. सुतार भले ही अब हमारे बीच न हों, लेकिन उनकी बनाई मूर्तियां सदियों तक उन्हें जीवित रखेंगी। उनका जीवन और कर्म भारतीय कला इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज रहेगा।
