बापू ग्राम बचाने को संघर्ष तेज, PM मोदी से लगाई जाएगी गुहार
देहरादून/ऋषिकेश: बापू ग्राम को राजस्व ग्राम घोषित करने की मांग को लेकर चल रहा संघर्ष अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता नजर आ रहा है। संघर्ष समिति ने अपनी मांगों को लेकर आंदोलन तेज करने का फैसला लिया है और अब सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक अपनी बात पहुंचाने की तैयारी कर ली है। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 14 अप्रैल को देहरादून के महेंद्र ग्राउंड (परेड ग्राउंड) में जनसभा को संबोधित करने आ रहे हैं, ऐसे में समिति इस मौके को अहम मान रही है।
इससे पहले संघर्ष समिति के प्रतिनिधिमंडल ने हरिद्वार लोकसभा सांसद एवं पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से मुलाकात कर अपनी समस्याओं से अवगत कराया। समिति ने सांसद से आग्रह किया कि वे बापू ग्राम के मुद्दे को प्रधानमंत्री के समक्ष प्रमुखता से उठाएं। इस पर सांसद रावत ने आश्वासन दिया है कि वे क्षेत्रवासियों की समस्या प्रधानमंत्री तक जरूर पहुंचाएंगे।
वहीं, आंदोलन को और धार देने के लिए संघर्ष समिति ने 12 अप्रैल (रविवार) को बापू ग्राम स्थित धरना स्थल पर एक महासभा आयोजित करने का ऐलान किया है। इस महासभा में अधिक से अधिक संख्या में प्रभावित लोगों से पहुंचने की अपील की गई है। शनिवार शाम हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया, जिसमें आंदोलन को और तेज करने पर सहमति बनी।
धरना लगातार 92वें दिन भी जारी रहा। समिति का कहना है कि जब तक बापू ग्राम को राजस्व ग्राम घोषित नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। इस पूरे मामले पर सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई चल रही है, जिससे लोगों की उम्मीदें न्यायालय और सरकार दोनों पर टिकी हैं।महासभा में केवल बापू ग्राम ही नहीं, बल्कि मीरा नगर, शिवाजी नगर, गीता नगर, 20 बीघा, मनसा देवी, श्यामपुर और रायवाला समेत आसपास के कई क्षेत्रों के लोग भी शामिल होंगे। इनमें वे लोग भी होंगे जिनकी यहां संपत्ति है या जिनके परिजन इस क्षेत्र में निवास करते हैं।
समिति के सदस्यों रमेश जुगलान, दिनेश चंद्र मास्टर, सत्या कपरूवाण, नूरी सहित अन्य पदाधिकारी इस आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। समिति का कहना है कि उनकी मुख्य मांग क्षेत्र को राजस्व ग्राम घोषित करने की है, ताकि लोगों को मूलभूत सुविधाएं और कानूनी अधिकार मिल सकें।
अब सभी की नजरें रविवार को होने वाली महासभा पर टिकी हैं, जहां आगे की रणनीति तय की जाएगी। साथ ही यह भी देखना अहम होगा कि प्रधानमंत्री के दौरे के दौरान इस मुद्दे को किस तरह उठाया जाता है और सरकार की ओर से क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।
