स्वामी चिदानंद सरस्वती महाराज ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया कवि सम्मेलन का उद्घाटन
ऋषिकेश: ऋषिकेश बसंतोत्सव २०२६ के अंतर्गत शाम को भव्य कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस अवसर पर परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती महाराज ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उनके साथ महंत वत्सल प्रपन्नाचार्य महाराज भी उपस्थित रहे।
कवि सम्मेलन में विभिन्न प्रतिभाशाली कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से श्रोताओं का मन मोहा। कार्यक्रम में डॉ. अनामिका जैन अंबर, जॉनी बैरागी, आशीष अनल, प्रवीण पांडेय, आश्विन पांडेय, शिखा दीप्ति, और दुर्गेश तिवारी ने अपनी कविताओं का पाठ किया।डॉ. अनामिका जैन अंबर ने अपनी प्रमुख कविता की कुछ पंक्तियां साझा कीं – “सपनों का बोझ वहीं उठा सकते हैं अम्बर, जिनकी रीढ़ हौसलों के दम पर खड़ी हो अम्बर, मेरे गले में जीत की जो माला पड़ी है मेहनत के मोतियों से बनाई वो लड़ी है।
कवि सम्मेलन की शुरुआत कवयित्री शिखा दीप्ति ने सरस्वती वंदना से की। इसके बाद कवियों ने अपनी-अपनी रचनाओं के माध्यम से गंगा, जीवन और मेहनत जैसे विषयों पर आधारित कविताओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया।कवि दुर्गेश तिवारी ने गंगा नदी की महत्ता पर कविता प्रस्तुत की “हमारी आन है गंगा, शान है गंगा, कोई मां कोई देवी है बुलाता, सनातन की पहचान है गंगा।” वहीं कवि प्रवीण पांडेय ने जीवन की कठिनाइयों और संघर्ष पर आधारित पंक्तियां सुनाईं “मीठी नदिया, जिसकी मंजिल खारी खारी है, जीवन भर आराम न पाने की लाचारी है।
शाम 6:00 बजे शुरू हुए कवि सम्मेलन में उपस्थित श्रोताओं ने कवियों की प्रस्तुतियों पर जोरदार तालियों और वाह-वाह से हौसला अफजाई की। इस अवसर पर ऋषिकेश से कई गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित रहे और कार्यक्रम का आनंद लिया।
