हृदय वाल्व लीकेज से जूझ रहे 65 वर्षीय मरीज को एम्स ऋषिकेश ने बिना सर्जरी दिया नया जीवन

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ऋषिकेश : एम्स ऋषिकेश के चिकित्सकों ने हृदय रोग उपचार के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए 65 वर्षीय बुजुर्ग मरीज के जीवन को बिना ओपन हार्ट सर्जरी के बचाने में सफलता प्राप्त की है। मरीज के हृदय के माइट्रल वाल्व में गंभीर लीकेज के कारण उसकी हृदय पम्पिंग क्षमता घटकर मात्र 20 प्रतिशत रह गई थी, जिससे उसकी स्थिति अत्यंत गंभीर हो गई थी। उम्र अधिक होने और पूर्व में हृदय संबंधी उपचार हो चुके होने के कारण मरीज सर्जरी के लिए उपयुक्त नहीं था। ऐसे में एम्स ऋषिकेश के कार्डियोलॉजी विभाग ने अत्याधुनिक ट्रांसकैथेटर एज-टू-एज रिपेयर तकनीक का उपयोग कर बिना सर्जरी सफल इलाज किया।

यह जटिल प्रक्रिया 30 दिसंबर 2025 को संपन्न की गई। मरीज हरिद्वार जनपद की तहसील रुड़की के मोहनपुर जट गांव निवासी जगतवीर सिंह हैं। इलाज के बाद अब उनकी सेहत में उल्लेखनीय सुधार है और उन्हें हाल ही में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।इलाज के उपरांत मरीज जगतवीर सिंह ने बताया कि वर्ष 2023 में उनके हृदय में स्टंट डाले गए थे, लेकिन पिछले कुछ महीनों से उन्हें फिर से सांस फूलने और चलने-फिरने में भारी दिक्कत होने लगी थी। हरिद्वार के विभिन्न चिकित्सालयों में जांच के बाद उनके हृदय के माइट्रल वाल्व में गंभीर लीकेज की पुष्टि हुई और तत्काल सर्जरी की सलाह दी गई। हालांकि, उम्र और पहले से हृदय संबंधी उपचार होने के कारण यह सर्जरी जोखिमपूर्ण थी। ऐसे में उन्होंने एम्स ऋषिकेश में उपचार कराने का निर्णय लिया, जहां विशेषज्ञ चिकित्सकों ने टीईईआर तकनीक से सफल इलाज किया।

एम्स ऋषिकेश के कार्डियोलॉजिस्ट एवं एडिशनल प्रोफेसर डॉ. बरूण कुमार ने बताया कि मरीज के हृदय की पम्पिंग क्षमता सामान्य 60 प्रतिशत के मुकाबले घटकर 20 प्रतिशत रह गई थी, जो जीवन के लिए गंभीर खतरा थी। उन्होंने बताया कि इस इंटरवेंशनल प्रक्रिया में बिना छाती खोले, जांघ की रक्त नली के माध्यम से हृदय तक पहुंचकर माइक्लिप डिवाइस की सहायता से माइट्रल वाल्व की लीकेज को काफी हद तक नियंत्रित किया गया। यह प्रक्रिया पूरी तरह न्यूनतम इनवेसिव है और इसमें ओपन हार्ट सर्जरी की आवश्यकता नहीं होती।

डॉ. बरूण कुमार के अनुसार, इस तकनीक से हृदय की कार्यक्षमता में सुधार होता है, जिससे मरीज को सांस फूलने, अत्यधिक थकान और दैनिक गतिविधियों में होने वाली कठिनाइयों से राहत मिलती है। साथ ही मरीज को कम समय में स्वस्थ होकर अस्पताल से छुट्टी मिल जाती है। इस सफल उपचार टीम में कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. सुवेन कुमार, सीटीवीएस विभाग के वरिष्ठ सर्जन डॉ. अंशुमान दरबारी, एनेस्थीसिया विभाग से डॉ. अजय कुमार सहित अन्य विशेषज्ञ चिकित्सक शामिल रहे।

एम्स ऋषिकेश की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह सफलता संस्थान में उपलब्ध अत्याधुनिक और विश्वस्तरीय हृदय रोग उपचार सुविधाओं को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि अब जटिल हृदय रोगों का इलाज बिना ओपन हार्ट सर्जरी के भी संभव हो रहा है, जिससे मरीजों के जीवन की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार आ रहा है। उन्होंने पूरी चिकित्सा टीम के कार्य की सराहना की।यह उपलब्धि न केवल एम्स ऋषिकेश की चिकित्सा क्षमता को दर्शाती है, बल्कि उत्तराखंड सहित आसपास के राज्यों के गंभीर हृदय रोगियों के लिए भी एक नई उम्मीद बनकर सामने आई है।

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