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ऋषिकेश : अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर तीर्थनगरी ऋषिकेश स्थित ऐतिहासिक भरत मंदिर में श्रद्धालुओं की आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। सुबह से ही मंदिर परिसर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी, जहां श्रद्धालु भगवान हृषिकेश नारायण के दर्शन कर 108 परिक्रमा करते नजर आए। पूरे क्षेत्र में भक्ति और श्रद्धा का माहौल बना रहा।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अक्षय तृतीया के दिन भरत मंदिर की 108 परिक्रमा करना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन की गई परिक्रमा से भगवान बद्रीनाथ के दर्शन के समान फल प्राप्त होता है। इसी आस्था के चलते दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने श्रद्धा भाव से परिक्रमा कर भगवान का आशीर्वाद प्राप्त किया।

इस विशेष दिन की एक और अनूठी परंपरा है भगवान हृषिकेश नारायण के चरणों के दर्शन, जो वर्ष में केवल अक्षय तृतीया के अवसर पर ही संभव होते हैं। जैसे ही मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खुले, भक्तों में चरण दर्शन के लिए उत्साह और उमंग देखने को मिला। लोगों ने कतारों में खड़े होकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन की गई परिक्रमा से न केवल मनवांछित फल की प्राप्ति होती है, बल्कि सभी पापों का नाश होकर जीवन में सुख-समृद्धि और ऐश्वर्य का वास होता है। यही कारण है कि हर वर्ष इस अवसर पर हजारों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।

करीब 12वीं शताब्दी से स्थापित इस प्राचीन मंदिर का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व भी बेहद खास है। अक्षय तृतीया के दिन यहां का नजारा किसी बड़े धार्मिक उत्सव से कम नहीं होता। मंदिर प्रशासन द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गईं, जिससे दर्शन और परिक्रमा सुचारु रूप से संपन्न हो सकी।

कुल मिलाकर, अक्षय तृतीया के इस पावन अवसर पर श्री भरत मंदिर में उमड़ी आस्था की यह भीड़ एक बार फिर यह साबित करती है कि भारतीय संस्कृति में धार्मिक परंपराओं और मान्यताओं का गहरा प्रभाव आज भी कायम है।

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