सूखी ठंड का कहर, चमोली के उच्च हिमालयी इलाकों में जम गए नदी-नाले

खबर शेयर करें -

गोपेश्वर/चमोली: इन दिनों पहाड़ी क्षेत्रों में पड़ रही सूखी ठंड ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। चमोली जिले सहित उच्च हिमालयी क्षेत्रों में लंबे समय से बारिश और बर्फबारी न होने के कारण ठंड का असर और अधिक बढ़ गया है। तापमान में लगातार गिरावट के चलते बद्रीनाथ धाम, औली, नीति घाटी और आसपास के इलाकों में नदी-नाले और झरने जमने लगे हैं। कई स्थानों पर पानी की धार बर्फ में तब्दील हो गई है, जिससे प्राकृतिक जलस्रोतों पर निर्भर ग्रामीणों की परेशानियां बढ़ती जा रही हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल सर्दियों में बर्फबारी होने से जहां जलस्रोतों में पानी बना रहता था, वहीं इस बार सूखी ठंड के कारण हालात अलग हैं। न बर्फ गिरी और न ही पर्याप्त वर्षा हुई, जिससे नदियों और गधेरों में पानी का स्तर काफी कम हो गया है। ऊपर से कड़ाके की ठंड के कारण जो थोड़ा-बहुत पानी है, वह भी जम रहा है।

बद्रीनाथ धाम और औली जैसे ऊंचाई वाले पर्यटन स्थलों में भी हालात चिंताजनक बने हुए हैं। औली में पर्यटक बर्फ की कमी से मायूस हैं, जबकि नीति घाटी और सीमावर्ती क्षेत्रों में ठंड ने जनजीवन को ठिठुरा दिया है। कई गांवों में पेयजल संकट गहराने लगा है और पशुपालकों को भी पशुओं के लिए पानी की व्यवस्था करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

मौसम विज्ञानियों के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय न होने के कारण फिलहाल बारिश और बर्फबारी की संभावना कम है। यदि आने वाले दिनों में भी मौसम का मिजाज ऐसा ही बना रहा, तो सूखी ठंड के चलते पानी की समस्या और गंभीर हो सकती है। फिलहाल पहाड़ में कड़ाके की ठंड के बीच लोग आसमान की ओर टकटकी लगाए बारिश और बर्फबारी का इंतजार कर रहे हैं, ताकि जमते जलस्रोतों को कुछ राहत मिल सके।

Ad