लोकतंत्र के लिए प्राण न्योछावर करने वाले अमर शहीद श्रीदेव सुमन

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बलिदान दिवस विशेष | उत्तराखंड टाइम्स लाइव

देहरादून/टिहरी। उत्तराखंड के इतिहास में यदि किसी एक व्यक्ति ने सत्य, लोकतंत्र और जनअधिकारों की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर किया, तो वह नाम है अमर शहीद श्रीदेव सुमन। टिहरी रियासत के अत्याचारी शासन के विरुद्ध उनका संघर्ष केवल एक आंदोलन नहीं था, बल्कि वह जनस्वाभिमान की ऐसी मशाल थी, जिसकी रोशनी आज भी उत्तराखंड के जनमानस को प्रेरित करती है। प्रत्येक वर्ष 25 जुलाई को उनका बलिदान दिवस पूरे प्रदेश में श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाया जाता है।

टिहरी रियासत के खिलाफ आवाज

25 मई 1916 को टिहरी गढ़वाल के जौल गांव में जन्मे श्रीदेव सुमन का मूल नाम श्रीदत्त बडोनी था। युवावस्था से ही उन्होंने महात्मा गांधी के विचारों को अपनाया और टिहरी रियासत में फैले दमन, अन्याय और नागरिक अधिकारों के हनन के खिलाफ संघर्ष शुरू किया।उस दौर में टिहरी रियासत में जनता को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, संगठन बनाने और शासन की आलोचना करने का अधिकार नहीं था। श्रीदेव सुमन ने इन अन्यायपूर्ण व्यवस्थाओं को चुनौती दी और जनता को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक किया।

84 दिनों की ऐतिहासिक भूख हड़ताल

रियासत ने उनके बढ़ते जनसमर्थन से घबराकर उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। जेल में उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया गया। इसके विरोध में उन्होंने 84 दिनों तक भूख हड़ताल की। लगातार शारीरिक यातनाओं और उपेक्षा के बावजूद उन्होंने अपना संकल्प नहीं छोड़ा। 25 जुलाई 1944 को जेल में ही उन्होंने अंतिम सांस ली। उन्होंने अपने प्राण तो त्याग दिए, लेकिन अन्याय के सामने कभी झुके नहीं। यही कारण है कि उन्हें उत्तराखंड के लोकतांत्रिक संघर्ष का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है।

बलिदान जिसने इतिहास बदल दिया

श्रीदेव सुमन का बलिदान टिहरी रियासत के विरुद्ध चल रहे जनआंदोलन का निर्णायक मोड़ साबित हुआ। उनके संघर्ष ने जनता में नई चेतना जगाई और लोकतांत्रिक अधिकारों की मांग को मजबूत किया। आगे चलकर टिहरी रियासत का भारत में विलय हुआ और उनके विचारों ने उत्तराखंड राज्य आंदोलन तक को प्रेरित किया।

आज भी जीवित है उनकी प्रेरणा

आज जब लोकतंत्र, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और नागरिक अधिकारों की चर्चा होती है, तब श्रीदेव सुमन का जीवन हमें याद दिलाता है कि लोकतंत्र केवल संविधान की देन नहीं, बल्कि अनगिनत बलिदानों का परिणाम है। उनका जीवन हमें सत्य, साहस, त्याग और अन्याय के विरुद्ध डटकर खड़े होने की प्रेरणा देता है।

श्रीदेव सुमन केवल इतिहास के एक पात्र नहीं हैं, बल्कि उत्तराखंड की आत्मा, स्वाभिमान और जनसंघर्ष के अमर प्रतीक हैं। उनका बलिदान आने वाली पीढ़ियों को सदैव यह संदेश देता रहेगा कि सत्य और न्याय की राह कठिन हो सकती है, लेकिन अंततः वही इतिहास रचती है।

उत्तराखंड टाइम्स लाइव” की ओर से अमर शहीद श्रीदेव सुमन को शत-शत नमन।

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