मिडिल ईस्ट से मिली सीख, भारत की नई सैन्य रणनीति

खबर शेयर करें -

नई दिल्ली : मिडिल ईस्ट में हाल के वर्षों में हुए युद्धों और सैन्य अभियानों से मिले अनुभवों ने दुनिया भर की सेनाओं की रणनीतियों को नई दिशा दी है। इसी क्रम में भारतीय वायु सेना (IAF) भी अपनी युद्धक क्षमताओं को आधुनिक तकनीक से सशक्त बनाने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है। विशेष रूप से ड्रोन और लोइटरिंग म्यूनिशंस पर फोकस बढ़ाया जा रहा है, जिन्हें आधुनिक युद्ध का महत्वपूर्ण हथियार माना जा रहा है।

रक्षा सूत्रों के अनुसार, इजरायल-हमास संघर्ष, रूस-यूक्रेन युद्ध और अन्य मिडिल ईस्ट सैन्य अभियानों में ड्रोन तकनीक के व्यापक उपयोग ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य के युद्धों में मानवरहित प्रणालियां निर्णायक भूमिका निभाएंगी। इन्हीं अनुभवों से प्रेरणा लेते हुए IAF अपने बेड़े में एडवांस्ड सर्विलांस ड्रोन, कॉम्बैट यूएवी और लोइटरिंग म्यूनिशंस को शामिल करने की रणनीति पर काम कर रही है।

लोइटरिंग म्यूनिशंस को आम भाषा में ‘कामिकाज़े ड्रोन’ भी कहा जाता है। ये लक्ष्य क्षेत्र के ऊपर कुछ समय तक मंडराते रहते हैं और जैसे ही सटीक लक्ष्य की पहचान होती है, तुरंत उस पर हमला कर उसे नष्ट कर देते हैं। यह तकनीक दुश्मन के रडार, बंकर, वाहन और सामरिक ठिकानों को निशाना बनाने में बेहद प्रभावी मानी जाती है।

भारतीय वायु सेना का मानना है कि इस तरह की आधुनिक तकनीक सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने, दुश्मन की गतिविधियों पर पैनी नजर रखने और आवश्यकता पड़ने पर त्वरित जवाबी कार्रवाई करने में मददगार साबित होगी। इसके अलावा, इन प्रणालियों के उपयोग से पायलटों के जोखिम को भी काफी हद तक कम किया जा सकता है।

रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में भारत के लिए यह कदम बेहद महत्वपूर्ण है। ड्रोन और लोइटरिंग म्यूनिशंस के जरिए भारतीय वायु सेना अपनी सामरिक तैयारी को और मजबूत करने के साथ-साथ भविष्य के युद्धों के लिए खुद को अधिक सक्षम बना रही है। यह पहल देश की वायु सुरक्षा और रक्षा रणनीति को नई मजबूती देने वाली साबित हो सकती है।

Ad