मोदी–पुतिन की मुलाकात में ऊर्जा, रक्षा और व्यापार सहयोग को नई गति
नई दिल्ली: हैदराबाद हाउस में सोमवार को आयोजित 23वें भारत–रूस वार्षिक सम्मेलन ने दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊर्जा देने का काम किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मौजूदगी में रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष, व्यापार, शिक्षा और विज्ञान सहित कई रणनीतिक क्षेत्रों में 16 महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। दोनों नेताओं ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुँचाने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य की भी घोषणा की।
बैठक के केंद्र में सैन्य और सुरक्षा सहयोग रहा। दोनों देशों ने रक्षा उत्पादन, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण तथा संयुक्त अनुसंधान पर सहमति जताई। नई रक्षा प्रणालियों को संयुक्त रूप से विकसित करने, स्पेयर पार्ट्स उत्पादन बढ़ाने और हथियारों की समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए एक उच्च स्तरीय मैकेनिज्म स्थापित किया जाएगा।
रूस ने भारतीय रक्षा क्षेत्र को और अधिक तकनीक उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता जताई, वहीं भारत ने रूस के साथ दीर्घकालिक सैन्य साझेदारी को मजबूत करने पर जोर दिया। सेना, नौसेना और वायुसेना स्तर पर संयुक्त अभ्यासों की संख्या बढ़ाने की सहमति भी बनी।
ऊर्जा सहयोग इस बैठक का प्रमुख स्तंभ रहा। दोनों देशों ने तेल और गैस सप्लाई चेन को और मजबूत करने, नए क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने तथा दीर्घकालिक समझौते करने पर जोर दिया।परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में भी सहयोग को अगले चरण तक ले जाने की घोषणा की गई कूडनकुलम परमाणु परियोजना की प्रगति पर संतोष जताते हुए भविष्य में नई यूनिट्स विकसित करने पर बातचीत आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया।
वर्तमान में भारत और रूस के बीच व्यापार लगभग 65–70 अरब डॉलर के आसपास है। दोनों देशों ने इसे बढ़ाकर 2030 तक 100 अरब डॉलर तक ले जाने का रोडमैप तैयार किया है।इसके लिए लॉजिस्टिक्स सुधार, शिपिंग कॉरिडोर को सुगम बनाने, भारतीय फार्मा, आईटी, कृषि और ऑटोमोबाइल क्षेत्र को रूसी बाजार में नए अवसर प्रदान करने की योजना बनाई गई है।

भारत ने रूसी निवेशकों को मैन्युफैक्चरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में बड़े अवसर उपलब्ध कराने की बात कही। इसके साथ ही भुगतान प्रणाली को सरल बनाने और व्यापार को राष्ट्रीय मुद्राओं में बढ़ावा देने पर भी चर्चा हुई।
भारत और रूस ने अंतरिक्ष विज्ञान में संयुक्त मिशन, सैटेलाइट डेटा साझेदारी और गगनयान परियोजना में तकनीकी सहयोग को और विस्तृत करने पर सहमति जताई।शिक्षा और अनुसंधान क्षेत्रों में विश्वविद्यालय स्तरीय कार्यक्रम, स्टूडेंट एक्सचेंज और संयुक्त रिसर्च प्रोजेक्ट बढ़ाने के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए।
दोनों देशों के नेताओं ने आतंकवाद को वैश्विक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ी चुनौती बताया और किसी भी रूप में आतंकवाद को समर्थन देने वाली ताकतों की निंदा की। जलवायु परिवर्तन, खाद्य सुरक्षा, आर्कटिक सहयोग और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को स्थिर रखने पर भी व्यापक चर्चा हुई।
सम्मेलन के दौरान दोनों नेताओं ने एक-दूसरे की भूमिका और नेतृत्व की सराहना की। प्रधानमंत्री मोदी ने भारत–रूस मित्रता को “दशकों पुराना भरोसा और रणनीतिक साझेदारी का आधार” बताया, वहीं राष्ट्रपति पुतिन ने भारत को “दुनिया का विश्वसनीय साझेदार” कहा। 23वें वार्षिक सम्मेलन में हस्ताक्षरित 16 समझौते भारत–रूस संबंधों को और मजबूत करते हैं। रक्षा, ऊर्जा, विज्ञान और व्यापार में विस्तृत सहयोग दोनों देशों को वैश्विक मंच पर नई दिशा देता है। 2030 तक व्यापार को 100 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य भारत–रूस साझेदारी को नए युग में प्रवेश कराने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
