देहरादून में आईसीजेएस-2.0 क्रियान्वयन को लेकर स्टेट अपेक्स कमेटी की बैठक
देहरादून : मुख्य सचिव आनंद वर्द्धन की अध्यक्षता में राज्य सचिवालय में आयोजित स्टेट अपेक्स कमेटी की बैठक में राज्य में इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (आई.सी.जे.एस.)–2.0 के प्रभावी और समयबद्ध क्रियान्वयन को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक में आई.सी.जे.एस.-2.0 के तहत आवश्यक कंप्यूटर हार्डवेयर एवं अन्य उपकरणों की खरीद प्रक्रिया को शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए गए।
मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि सभी उपकरणों एवं संसाधनों की खरीद भारत सरकार द्वारा निर्धारित मानकों और स्वीकृत अनुदान के अनुरूप ही की जाए। उन्होंने अधिकारियों को पारदर्शिता, गुणवत्ता और समयबद्धता का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए, ताकि परियोजना का लाभ प्रदेश की कानून व्यवस्था और न्याय प्रणाली को शीघ्र प्राप्त हो सके।बैठक में डीआरडीओ द्वारा विकसित आधुनिक प्रणाली से युक्त पांच ‘वज्र’ वाहनों की खरीद पर भी चर्चा की गई। इन वाहनों के माध्यम से राज्य की सुरक्षा एवं आपातकालीन प्रतिक्रिया क्षमता को और सुदृढ़ करने की योजना है। मुख्य सचिव ने संबंधित विभागों को खरीद प्रक्रिया में सभी तकनीकी मानकों का पालन सुनिश्चित करने को कहा।
मुख्य सचिव आनंद वर्द्धन ने प्रदेश में ई-एफआईआर प्रणाली की प्रभावी मॉनिटरिंग पर विशेष जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि दर्ज की गई ई-एफआईआर पर तीन दिन के भीतर अनिवार्य रूप से कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। इसके लिए एक सुदृढ़ निगरानी तंत्र विकसित करने को कहा गया, जिससे शिकायतों के निस्तारण में तेजी आए और आमजन को समय पर न्याय मिल सके।
उन्होंने कहा कि आई.सी.जे.एस.-2.0 के माध्यम से पुलिस, न्यायालय, कारागार, अभियोजन और फॉरेंसिक विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा, जिससे आपराधिक मामलों के निपटारे की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनेगी।बैठक में सचिव शैलेश बगोली, वी. षणमुगम, अपर सचिव निवेदिता कुकरेती, पुलिस महानिरीक्षक विम्मी सचदेवा, निदेशक आईटीडीए आलोक पांडे सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने परियोजना की प्रगति से अवगत कराते हुए आगामी कार्ययोजना पर भी विस्तार से चर्चा की।
राज्य सरकार का उद्देश्य तकनीकी सुदृढ़ीकरण के माध्यम से कानून व्यवस्था को मजबूत करना और नागरिकों को त्वरित एवं पारदर्शी सेवाएं उपलब्ध कराना है। आई.सी.जे.एस.-2.0 के सफल क्रियान्वयन से प्रदेश की आपराधिक न्याय प्रणाली को आधुनिक और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
