उत्तराखंड ने रचा इतिहास: समान नागरिक संहिता से सामाजिक न्याय को नई दिशा सीएम धामी

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देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड ने समान नागरिक संहिता को लागू कर देश में सामाजिक न्याय, समानता और समरसता की दिशा में एक नई मिसाल पेश की है। उन्होंने कहा कि यह कानून किसी भी वर्ग या समुदाय के खिलाफ नहीं है, बल्कि सभी नागरिकों को समान अधिकार और अवसर प्रदान करने की भावना से प्रेरित है।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि समान नागरिक संहिता का उद्देश्य समाज में व्याप्त भेदभाव को समाप्त करना और सभी नागरिकों के लिए एक समान कानूनी व्यवस्था सुनिश्चित करना है। इससे महिलाओं के अधिकारों को मजबूती मिलेगी और पारिवारिक तथा सामाजिक ढांचे में पारदर्शिता आएगी। उन्होंने कहा कि यूसीसी संविधान की मूल भावना के अनुरूप है और यह “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास” के सिद्धांत को मजबूत करता है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री धामी ने राज्य सरकार द्वारा लागू किए गए नए अल्पसंख्यक शिक्षा कानून पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह कानून किसी एक समुदाय विशेष के लिए नहीं, बल्कि राज्य के सभी समुदायों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण, आधुनिक और समावेशी शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाया गया है। इसका मकसद शिक्षा के क्षेत्र में समान अवसर सुनिश्चित करना और बच्चों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड सरकार शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का सबसे सशक्त माध्यम मानती है। अल्पसंख्यक शिक्षा कानून के तहत शिक्षा संस्थानों की गुणवत्ता में सुधार, बुनियादी ढांचे का विकास और आधुनिक शिक्षण संसाधनों की उपलब्धता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि हर बच्चे को समान रूप से आगे बढ़ने का अवसर मिल सके।

अंत में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार समाज के हर वर्ग के हितों को ध्यान में रखते हुए नीतियां बना रही है और आने वाले समय में भी समानता, न्याय और विकास के मार्ग पर आगे बढ़ती रहेगी।

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